हरियाणा

रेलवे के नक्शे पर इतिहास रचने को तैयार हुआ जींद

इसी महीने चल सकती है जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन

Satyakhabarindia

 

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रेलवे के नक्शे पर जींद एक बार फिर अपना नाम अलग से चमकाने की तैयारी में है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से सोनीपत ट्रैक पर उड़ान भरने को तैयार है। यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ परिवहन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। भारत जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन के बाद हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला 5वां देश होगा। और भारत में पहली ट्रेन जींद से चलाई जाएगी।

इस ट्रेन को ईंधन देने के लिए जींद में हाईड्रोजन प्लांट बनकर तैयार हो चुका है। इसका कई बार निरीक्षण हो चुका है। दूसरी ओर ट्रेन का इंजन बनकर तैयार है। यह इंजन और रेल गाड़ी जींद पहुंच चुकी है और वर्तमान में इसकी टेस्टिंग का काम चल रहा है। जल्द ही रेलवे इस ट्रेन को शुरू करने की तैयारी कर रहा है। उम्मीद की जा रही है कि इसी महीने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाने का काम करेंगे। रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने अपने एक्स हैंडल देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की झलक दिखाते हुए इसकी विशेषताओं को बताता एक वीडियो शेयर किया था।

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देश में चलने वाली पहली नई हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की सबसे शक्तिशाली और सबसे लंबी हाइड्रोजन चालित ट्रेन होगी, जो 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगी। पहली हाइड्रोजन चालित ट्रेन के कोच का हाल ही में चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में परीक्षण पूरा किया गया था। इस परीक्षण के बाद यह ट्रेन अब जींद पहुंच चुकी है। पिछले दो दिनों से इस ट्रेन का यहां हाइड्रोजन प्लांट में लगातार टेस्टिंग किया जा रहा है।
पिछले महीने ही रेल मंत्री वैष्णव ने इस परीक्षण को भारत के भविष्य के

लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया था। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि 1,200 हार्सपावर वाली यह ट्रेन भारत को हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक में अग्रणी बनाएगी।
हाइड्रोजन ट्रेन फार हैरिटेज पहल के तहत भारतीय रेलवे देश में 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना बना रहा है, जिनमें से प्रत्येक की लागत लगभग 80 करोड़ रुपये होगी। जींद सोनीपत के बाद जींद-चंडीगढ़ और जींद-दिल्ली ट्रेन को भी हाइड्रोजन से चलाए जाने की तैयारी की जा रही है।
विरासत और पहाड़ी मार्गों के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर प्रतिमार्ग 70 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस पायलट परियोजना में एक डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट रैक को हाइड्रोजन ईंधन में अपग्रेड करने की योजना है।
जींद-गोहाना-सोनीपत ट्रैक के लिए हाइड्रोजन की आपूर्ति के लिए जींद में एक मेगावाट पालीमर इलेक्ट्रोलाइट मेम्ब्रेन प्लांट का निर्माण जारी है। यह प्लांट प्रतिदिन लगभग 430 किलो हाइड्रोजन का उत्पादन करेगा।
जींद में ईंधन भरने वाले स्टेशन में 3,000 किलो हाइड्रोजन भंडारण, कंप्रेसर और तेज़ ईंधन भरने के लिए प्री-कूलर इंटीग्रेशन वाले दो डिस्पेंसर होंगे।
जींद-गोहाना-सोनीपत रेलवे ट्रैक करीब 89 किलोमीटर लंबा है। हाइड्रोजन ट्रेन की गति 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी। ट्रेन में एक बार में 2,638 यात्री सफर कर सकेंगे।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल द्वारा संचालित ये ट्रेन डीजल ट्रेनों के विपरीत इमिशन के रूप में सिर्फ वाटर और हीट जेनरेट करती हैं। आठ कोच वाली ट्रेन एक ऐसी रेलगाड़ी है जो हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक पर आधारित होगी।
यह ट्रेन पारंपरिक डीजल ट्रेनों का एक पर्यावरण एवं अनुकूल विकल्प होगी। हाइड्रोजन ट्रेन में हाइड्रोजन गैस को ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाएगा। यह ट्रेन शून्य कार्बन उत्सर्जन करती है।
इसके इंधन धुएं की बजाय पानी व भाप छोड़ेंगे, जिससे प्रदूषण नहीं फैलेगा। हाइड्रोजन ट्रेन मौजूदा रेल संसाधनों के साथ आसानी से काम कर सकती हैं। यह तकनीक पर्यावरण को स्वच्छ रखती है।

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